अपनत्व पा गद्गद हुए डीआरडीओ के निदेशक |

भारत सरकार के प्रतिष्ठान रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के निदेशकों ने शांतिकुंज एवं देवसंस्कृति विश्वविद्यालय परिवार से मिले अपनत्व से अभिभूत हुए। परिणामस्वरूप कार्यक्रम के पश्चात् भी वे तीर्थ की चेतना को आत्मसात करने के लिए शांतिकुंज में रुके। गौरतलब हो कि अधिकांश निदेशक हरिद्वार पहली बार आये थे। इसलिए उन्होंने संस्थान के प्रत्येक सेवा कार्यों में भागीदारी की। सभी ने 1926 से सतत प्रज्वलित सिद्ध दीपक का दर्शन तथा 27 कुण्डीय यज्ञशाला में भागीदारी कर रक्षा अनुसंधान के कार्यों की सफलता की कामना की।

संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी व प्रख्यात अध्यात्मवेत्ता डॉ. प्रणव पण्ड्या से निदेशकों ने भेंट परामर्श किया। उन्हें शांतिकुंज की महत्त्वाकांक्षी योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। जून माह में आई हिमालय त्रासदी में हुए नुकसानों की भरपाई के लिए गायत्री परिवार द्वारा किये जा रहे सेवा कार्यों की विस्तार से जानकारी दी। निदेशकों ने इन कार्यों में सहयोग करने की बात कही।

डीआरडीओ के प्रकल्प तेजस एयरक्राप्ट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली डॉ इंदिरा एन ने कहा कि शांतिकुंज जिस तरह से युवाओं को जोड़कर जनसरोकारों के कार्यों को आगे बढ़ा रहा है, इससे निरूसंदेह स्वर्णिम राष्ट्र की परिकल्पना साकार होकर रहेगी। उन्होंने रक्षा विभाग के निदेशकों के व्यस्ततम कार्यक्रमों के बीच उन्हें एक और सात दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर शांतिकुंज आयोजित करने की बात कही। आईटीएम मसूरी के निदेशक डॉ एसएन सिन्हा ने कहा कि शांतिकुंज द्वारा किये जा रहे कई कार्य अपने आपमें शोध का विषय हैं।

सभी प्रतिभागियों ने अध्यात्म विज्ञान के समन्वय में शोधरत ब्रह्मवर्चस में स्थापित विभिन्न प्रकल्पों, देवसंस्कृति विवि के पाठ्यक्रमों एवं गतिविधियों को जानकार प्रसन्नता जाहिर की। अधिकतर प्रतिभागी पं० श्रीराम शर्मा आचार्य जी की युगसाहित्य प्रचुर मात्रा में अपने साथ ले गये। स्वावलम्बन विभाग, गौ उत्पादन निर्माण केन्द्र का भी भ्रमण किया।