सफल परिव्राजक वही, जो चरित्रवान हो : डॉ. प्रणव पण्ड्या
इंटर्नशिप संभावनाओं को अवसर में बदलने का सुनहरा मौका
देश के १३ राज्यों के ५८ जिलों में करीब साढ़े छ: सौ कार्यक्रम का संचालन करेंगे

हरिद्वार, १४ जून।
    शुक्रवार का दिन देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए नई सुबह का संदेश लेकर आया। जब उन्हें विश्वविद्यालय में अर्जित शिक्षा और विद्या का लाभ समाज में बांटने का निर्देश मिला। मौका था देसंविवि की अनूठी पद्वति इंटर्नशिप में जाने वाले विद्यार्थियों के विदाई समारोह का।
    पाँच दिन तक चले इस शिविर के समापन समारोह में परिव्राजक पाथेय विषय पर बोलते हुए देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधपति डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि दुनिया बदलेगी, तो परिव्राजकों से ही बदलेगी। उन्होंने परिव्राजक धर्म का आदर्श प्र्रस्तुत करने वाली स्वामी विवेकानंद को याद करते हुए कहा कि जब अपने इष्ट का संदेशवाहक बनकर निकलता है, तो उसकी शक्तियाँ सौ गुनी हो जाती हैं। उसके विचार, उसका चरित्र, और व्यवहार समाज को प्रभावित करता है। कहानी व लच्छेदार बातों से प्रभावित करने वाले लोग तो बहुत हैं, पर सफल परिव्राजक वही है, जो चरित्रवान और संवेदनशील है। संवेदनशील व्यक्ति ही सच्चा समाजसेवी हो सकता है। अपने जीवन का अनुभव बताते हुए उन्होंने कहा कि समाज के किसी भी क्षेत्र में सफल होना हो, तो समझदारी, ईमानदारी, जिम्मेदारी और बहादुरी को सदैव अपने छाती से चिपकाये रखना चाहिए।
    प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय ने कहा कि देवसंस्कृति विवि की अनूठी इंटर्नशिप प्रक्रिया के तहत यहाँ अध्ययनरत विद्यार्थियों को अपना पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद एक निश्चित अवधि के लिए परिव्रज्या करनी होती है, इसके पश्चात ही उन्हें डिग्री दी जाती है। उन्होंने कहा कि युवावर्ग की समस्याओं को युवा ही बेहतर ढंग से समझ सकता है और समझदार, सुलझा हुआ युवा ही उसका सर्वश्रेष्ठ समाधान सुझा सकता है।
    जनसंपर्क व सेवायोजन विभाग के समन्वयक श्री महेन्द्र शर्मा ने बताया कि युवा धर्म शिक्षकों की टोली महाराष्ट्र, मप्र, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, बिहार, उप्र, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान सहित १३ राज्यों के ५८ जिलों में करीब साढ़े छ: सौ छोटे-बड़े शहरों में देवसंस्कृति की अलख जगायेंगी। इनके कार्यक्रमों में भागदौड़ भरी जिंदगी जी रहे युवाओं को व्यक्तिगत संकीर्णता से ऊपर उठकर समाज व राष्ट्र के लिए अपना योगदान देने के लिए प्रेरित करना मुख्य उद्देश्य है।