देश भर के लोक कलाकारों का अभिनन्दन सम्मान समारोह

१ फरवरी को गणतन्त्र समारोह में राजपथ पर देश की आन बान और शान बढ़ाने वाले ४५० लोक कलाकारों का जत्था आज देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में पहुँचा। लोककलाकारों के इस महासंगम का अभिनन्दन करने विश्वभर के गायत्री साधक देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के मृत्युंजय सभागार में इकट्ठे हुए। इस अवसर देवसंस्कृति विवि के कुलाधिपति एवं गायत्री परिवार प्रमुख डॉ प्रणव पण्ड्या ने आगन्तुक विशेष अतिथियों व लोक कलाकारों का स्वागत करते हुए कहा भारत धर्म और अध्यात्म व देव संस्कृति का देश है। यहाँ के कण कण में संस्कृति सुगन्ध बिखरी पड़ी है। लोक कलाकार इस संस्कृति की सुगन्ध को देश के कोने कोने में पहुँचाते हैं।
इससे पूर्व स्वागत भाषण में देवसंस्कृति के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि भारतीय संस्कृति एक ऐसी डोरी है जिसे ८७ भाषा, १५०० बोलियों और ५०० सभ्यताओं के देश भारत को एक सूत्र में बाँधे रखा है। उन्होंने कहा कि हमारे लिए विश्व का प्रत्येक व्यक्ति परिवार का हिस्सा है। यही हमारी संस्कृति है जो सभ्यता से आरम्भ होती और दिव्यता में आरोहित होती है। प्रतिकुलपति ने कहा कि इस संस्कृति को कई बार बाँटने की कोशिश की गई, परन्तु यह कभी न बँटी न टूटी। यह आज भी विश्व मानवता को सद्ज्ञान और सद्भाव का प्रकाश प्रदान कर रही है।
इस अवसर पर कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए जिसमें हरियाणा के भगतसिंह महिला विश्वविद्यालय के कलाकारों ने नारीशक्ति पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया तथा छत्तीसगढ़ी कलाकारों ने समूह गान किया। हरिद्वार पहुँचे इस जत्थे ने इससे पूर्व गायत्री परिवार के प्रमुख केन्द्र शांतिकुंज का भ्रमण किया। समारोह में उपस्थित रक्षा मंत्रालय के अधिकारी, आयुष के अधिकारी, जिला सूचना अधिकारी, जिला प्रेस क्लब के प्रमुख के अलावा कुलसचिव सन्दीप कुमार, विश्वविद्यालय परिवार के अलावा शांतिकुंज एवं विश्वभर से आये गायत्री साधक बड़ी संख्या में उपस्थित थे। मंच संचालन गोपाल शर्मा एवं गुलाम अस्करी जैदी ने किया।
उत्तराखण्ड परेड दल की सदस्य पूजा आनन्द ने देवसंस्कृति विवि का आभार जताया। २६ जनवरी की परेड में उत्तराखण्ड के चार सदस्यों ने हिस्सा लिया जिसमें देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के वीएससी की द्वितीय वर्ष की छात्रा पूजा भी थी। पूजा ने कहा कि मेरे लिए यह गौरव की की बात है। इसका श्रेय देसंविवि को देती हूँ। विश्वविद्यालय के एनएसएस स्टाफ और कुलाधिपति एवं प्रतिकुलपति के स्नेह के कारण ही मैं इस टीम की सदस्या बन सकी।