देसंविवि में शोध पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन

रिसर्च के साथ सद्ज्ञान मिले, तो यह गौरव की बात : संदीप कुमार

०९ मई।

शोध पद्धति की जानकारी शोधार्थी एवं छात्रों को देने के उद्देश्य से देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आज समापन हो गया। इस सेमीनार में मध्यप्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों  से आये १५० प्रतिभगियों ने भागीदारी की।

        समापन अवसर पर देवसंस्कृति विवि के कुलपति श्री शरद पारधी ने कहा कि इन दिनों विज्ञान  के साथ सूचना क्रांति भी तेजी से प्रगति कर रही है। शोधार्थी को चाहिए कि वे इसका लाभ अपनी शोध पर करें, जिससे जनसामान्य को इसका लाभ मिल सके। उन्होंने जीवन में शोध का महत्त्व बताते हुए इसकी उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी दी।

        कुलसचिव श्री संदीप कुमार ने शोध के विभिन्न आयाम, बारीकियाँ, शोध पद्धतियाँ और उनकी प्रामाणिकता आदि पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि ज्ञान सबके लिए होना चाहिए और यदि यही ज्ञान सद्ज्ञान के रूप में रिसर्च के साथ मिल पाये, तो यह सभी के लिए गौरव की बात होगी। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो वीपी साहू ने रिसर्च की अवधारणा को बताते हुए शोध की विभिन्न चरणों की विस्तार से जानकारी दी। रोहतक के डॉ आशीष दहिया ने रिसर्च के नये आयामों की अवधारणा बताया। इस अवसर पर डॉ अभय सक्सेना, सुखनंदन सिंह, सहित अनेक लोगों ने रिसर्च के व्यावहारिक दृष्टिकोण को स्पष्ट किया। इस अवसर पर पर्यटन विभाग के मुख्य समन्वयक डॉ अरूणेश पाराशर ने सभी प्रतिभागियों एवं व्याख्याताओं का धन्यवाद ज्ञापन किया।