विद्यार्थियों ने में अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव,पांडिचेरी में जीते पदक

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय एवं गायत्री विद्यापीठ के विद्यार्थियों ने पांडिचेरी सरकार की ओर से आयोजित वर्ष 2013 के प्रथम अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में कई पदक जीते। इन विद्यार्थियों ने वासंती गणवेश में योग प्रदर्शित कर सभी का मन मोह लिया।
जनवरी के प्रथम सप्ताह में आयोजित इस योग महोत्सव में ये विद्यार्थी 11 देशों के प्रतिभागियों के बीच देवसंस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। इनमें 21 से 25 आयुवर्ग के पुरुष समूह में राजेश यादव व महिला समूह में अनुसूया नरवरे को द्वितीय स्थान मिला। तो वहीं 16 से 20 वर्ष आयुवर्ग में दिलराज प्रीत कौर को तृतीय एवं ओमी विश्नोई को चौथा स्थान प्राप्त हुआ। उल्लेखनीय है कि राजेश यादव ने इससे पूर्व हुई नेशनल योग प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता है। वहीं योग के क्षेत्र में महिला वर्ग में राष्ट्रीय स्तर पर दी जाने वाली प्रसिद्ध उपाधि योगसम्राज्ञी से दिलराज प्रीत कौर सम्मानित हो चुकी हैं।
योग कोच राकेश वर्मा व डॉ. पल्लवी के अनुसार इस प्रतियोगिता में देश के बीस राज्यों तथा श्रीलंका, जापान, चीन, रूस, ऑस्ट्रेलिया, कोरिया, नेपाल सहित 11 देशों के  विभिन्न आयुवर्ग में करीब सात सौ महिला व पुरुष शामिल थे। उन्होंने बताया कि 2013 की इस प्रथम अंतर्राष्ट्रीय योग प्रतियोगिता में प्रायोगिक परीक्षा के साथ-साथ लिखित परीक्षा भी हुई।
योग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ सुरेश वर्णवाल के अनुसार देवसंस्कृति विश्वविद्यालय ने अपने दस वर्ष की अल्प अवस्था में योग के क्षेत्र में कई कीर्तिमान स्थापित किये हैं। यहाँ के विद्यार्थियों ने कई अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर योग का प्रदर्शन कर देसंविवि का नाम योग के क्षितिज में कई नगीने गढ़े हैं।
विद्यार्थियों की इस सफलता के लिए अभिभावक स्वरूप देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्या व शैलदीदी ने उन्हें बधाइयाँ दी और कहा कि योग से तन, मन सुदृढ़ होता है। योग अनुशासित जीवन का पर्याय है। इसके दो आधार हैं- तकनीक व जीवन शैली। जब यह सधता है, तो जीवन में चमत्कार होते है एवं व्यक्तित्व खिलता है। कुलपति प्रो० एसडी शर्मा, प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या, कुलसचिव संदीप कुमार सहित पूरे देसंविवि व गायत्री विद्यापीठ परिवार ने इस सफलता पर हर्ष व्यक्त करते हुए 2013 के शानदार आगाज के लिए बधाइयाँ दी हैं।