देसंविवि से अभिभूत अर्जेन्टीना दल विदा

शान्तिकुन्ज, देसंविवि व ब्रह्मवर्चस् से खासे प्रभावित
योग, संस्कृति एवं अध्यात्म का हेरिटेज है देसंविवि -अलेजेन्ड्रो फेरेरो
विज्ञान व अध्यात्म का योग आज की सबसे बड़ी जरूरत -डॉ0 पाण्ड्या

हरिद्वार, 09 फरवरी अर्जेन्टीना से आया 29 सदस्यीय दल अपनी चार दिवसीय हरिद्वार यात्रा के बाद आज विदा हो गया । गणेशनाथ के नेतृत्व में आए इस दल ने देव संस्कृति  विश्वविद्यालय में प्रवास कर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों एवं स्वास्थ्य सेवा कार्यों का अध्ययन किया और शान्तिकुन्ज के सभी आध्यात्मिक व रचनात्मक कार्यक्रमों को देखा । दल के सदस्य ब्रह्मवर्चस् शोध संस्थान भी गए । वे वहाँ वैज्ञानिक अध्यात्मवाद पर चल रहे कार्यों से खासे प्रभावित हुए । दल ने योग, यज्ञ, प्राणिक हीलिंग, एक्यूप्रेशर, नैचुरोपैथी, पंचकर्म, योग निद्रा, मन्त्र थैरेपी, ध्यान पद्धतियाँ आदि का व्यावहारिक प्रशिक्षण विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों से लिया ।
देसंविवि में स्कूल ऑफ योग एण्ड हेल्थ के निदेशक डॉ0 चिन्मय पाण्ड्या ने बताया कि अर्जेन्टीनी दल में 05 पुरुष व 24 महिलाएँ शामिल थीं, इनमें विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर एवं योग विशेषज्ञ सम्मिलित थे । अलेजेन्ड्रो फेरेरो ने विश्वविद्यालय की समस्त गतिविधियों को देखने के बाद देसंविवि को योग, संस्कृति एवं अध्यात्म का सुन्दरतम हेरिटेज बताया । योग प्रशिक्षक नैन्सी क्रिस्टीना बोलीं, हरिद्वार की गंगा और देवात्मा हिमालय अन्तःकरण को बेहद प्रभावित् करते हैं । गंगा किनारे बसे शान्तिकुन्ज जैसे आश्रम केवल भारतवर्ष ही नहीं बल्कि दुनिया भर को अपनी तप-साधना का प्रकाश बिखेरते हैं । जीसस मार्कोस, श्रीमती लैटीनी नोमी लेडा, सुश्री लुसियाना ब्रूनी देव संस्कृति की वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों से अत्याधिक प्रभावित थे । दल के सदस्यों ने योग एवं अध्यात्म की शिक्षा विश्वविद्यालय से लेने की इच्छा व्यक्त की । आचार्य श्रीराम शर्मा के तपस्वी जीवन से बेहद प्रभावित दल के सदस्यों ने उनकी आत्मकथा ‘हमारी वसीयत एवं विरासत’ के अंग्रेजी संस्करण की सैकड़ों प्रतियाँ लीं ।
अजेन्टीनी दल देसंविवि के कुलाधिपति डॉ0 प्रणव पण्ड्या व शान्तिकुन्ज अधिष्ठात्री शैल जीजी से भी मिला । डॉ0 पण्ड्या ने उन्हें विश्वव्यापी युग निर्माण मिशन के क्रियाकलापों की जानकारी दी । आचार्यश्री के जन्म शताब्दी समारोहों की शुरुआत के समय शान्तिकुन्ज आगमन को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने शान्तिकुन्ज को आध्यात्मिक सेनिटोरियम कहा और बताया कि हरिद्वार के शान्तिकुन्ज से चल रहे सभी कार्यक्रम मानव मात्र के कल्याण के लिए चलाए जा रहे हैं । डॉ0 पण्ड्या ने कहा विज्ञान एवं अध्यात्म का योग आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है । शैल जीजी ने कहा कि प्रेम एवं सदभाव भारतीय संस्कृति की खासियत है । प्रेम की कोई भाषा नहीं होती, केवल उसकी अनुभूति की जा सकती है । उन्होंने स्वयं अच्छा बनकर अपने परिवार, राष्ट और प्रकारान्तर से विश्व को अच्छा बनाने का आवाह्न अर्जेन्टीनी दल से किया । कुलपति डॉ0 एस. पी. मिश्र ने दल को देसंविवि की उपलब्धियों की जानकारी दी, वहीं ब्रह्मवर्चस् के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ0 अमल कुमार दत्ता ने उन्हें ‘भविष्य का धर्म-वैज्ञानिक धर्म’ का मर्म समझाया ।
विश्वविद्यालय के मेधावी विद्यार्थियों से खासे प्रभावित ग्रुप लीडर गणेश नाथ ने विदाई के वक्त भारतीय छात्र-छात्राओं को प्रकाश पुन्ज कहा और आगे चलकर विश्व में प्रकाश बिखेरने की कामना की तथा अर्जेन्टीना आने का न्यौता दिया ।
अर्जेन्टीना दल को देसंविवि के डॉ0 कामाख्या कुमार, डॉ0 अमृतलाल र्गुवेन्द्र, ऊषा जायसवाल, असीम कुलश्रेष्ठ, शैलेन्द्र दूबे ने वैकल्पिक चिकित्सा का प्रशिक्षण दिया । आशुतोष साहू, राम अवतार पाटीदार, मनोज श्रीवास्तव, सुदर्शन कुमार व गोपिनी ने शिविर समन्वयन के दायित्व का निर्वहन किया ।