रक्षा अनुसंधान के निदेशकों ने सीखे जीवन प्रबंधन के गुर!

आत्म प्रबंधन से समस्याओं पर विजय निश्चित: डॉ. प्रणव पण्ड्याजी
‘आत्म
प्रौद्योगिकी, आत्म प्रबंधन’ विषय पर आयोजित हुई एक दिवसीय कार्यशाला
!

भारत सरकार के प्रतिष्ठान रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के निदेशकों के लिए एक उच्च स्तरीय कार्यशाला देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में आयोजित हुई। विषय था ‘आत्म प्रौद्योगिकी, आत्म प्रबंधन’। उच्चाधिकारियों को जीवन में अध्यात्म के अवलम्बन की विधा और जीवन जीने की कला सिखाने के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्रोलॉजी एंड मैनेजमेण्ट, डीआरडीओ, देवसंस्कृति विश्वविद्यालय शांतिकुंज के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित हुई।

निदेशकों को सम्बोधित करते हुए देसंविवि के कुलाधिपति डॉ प्रणव पण्ड्या ने कहा कि रक्षा अनुसंधान जैसे विषयों पर कार्य करने के लिए एकाग्रता चाहिए। मन, मस्तिष्क शांत हो और आत्म प्रबंधन सीख लें, तो जीवन के तमाम कार्यों में सफलता सुनिश्चित है। उन्होंने कहा कि यहाँ व्यक्ति का अंतरूप्रबंधन सिखाया जाता है। युवा छात्र- छात्राएँ एवं अध्यापक यहाँ व्यक्तित्व परिष्कार करना सीखते हैं। एक तरह से यह आंतरिक इंजीनियरिंग की विधा है। गीता एवं ध्यान के द्वारा कोई भी एकाग्रता- तल्लीनता को नियमित रूटीन में उतार सकता है। यह प्रयोग यहाँ विगत बारह वर्षों से चल रहा है व पूर्ण सफलता मिली है। ज्ञात हो कि डॉ प्रणव पण्ड्या जाने- माने हृदय रोग विशेषज्ञ के साथ प्रख्यात आध्यात्मिक मनोचिकित्सक भी हैं।

इससे पूर्व देसंविवि के प्रति कुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि शिक्षा के साथ विद्या को भी जीवन में शामिल करें। विद्या वह है जो मानव को पाप और पुण्य, सही और गलत में भेद करना सिखाता है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति यदि सही दिशा में चले तो दुनिया में ऐसी कोई ताकत नहीं, जो हमें विकास करने में रोक सके। डॉ. चिन्मय ने देसंविवि की महत्त्वाकांक्षी योजनाओं, पाठ्यक्रमों एवं स्थापना के पीछे युगऋषि पं० श्रीराम शर्मा जी की परिकल्पना ‘सुशिक्षित युवा- विकसित राष्ट्र’ पर विस्तार से प्रकाश डाला। प्रो० वीरेश्वर उपाध्याय ने ‘मैं कौन हूँ?’ तथा प्रो० कालीचरण शर्मा ने स्वस्थ जीवन की विभिन्न धाराओं पर विस्तार से जानकारी दी।

अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ इंदिरा एन., डॉ एस. बी. सिंह, डॉ आर.बी. श्रीवास्तव आदि निदेशकों का मानना है कि आत्मविज्ञान के प्रशिक्षण से प्रतिभागी निदेशक अपने कार्य से उत्पन्न होने वाली उलझनों और तनाव का बेहतर ढंग से प्रबंधन कर सकेंगे। इस कार्यशाला से उनकी कार्यदक्षता में वृद्धि होगी। टीबीआरएल के निदेशक डॉ मनजीत सिंह ने कहा कि प्रशिक्षण से हमें बहुत कुछ सीखने को मिला, जिससे व्यक्तिगत जीवन एवं विभागीय कार्यों में सहयोग मिलेगा। वहीं निदेशक डॉ. एस टंडन ने कहा कि यहाँ आकर जाना कि आत्म प्रबंधन भी कोई चीज होती है। ज्ञात हो कि भारत सरकार का डीआरडीओ एक महत्त्वपूर्ण विभाग है। यहाँ से देशभर के आंतरिक एवं सीमा सुरक्षा पर कार्य योजनाएँ बनाई जाती हैं।

प्रतिभागी निदेशकों ने शांतिकुंज व देसंविवि द्वारा संचालित हो रहे विभिन्न प्रकल्पों को बारीकी से अध्ययन किया एवं जाना कि किस प्रकार जन- जन की भागीदारी से बड़ी से बड़ी कार्य- योजनाएँ पूरी होती हैं। वहीं गोपाल शर्मा व राम अवतार पाटीदार ने ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान में अध्यात्म एवं विज्ञान के समन्वय से हो रहे अनुसंधानों से प्रतिभागियों को अवगत कराया। इस अवसर पर महानिदेशक डॉ. आर अरोरा, डॉ डी.के. खरल, डॉ. एके गुप्ता सहित डीआरडीओ, डीआईएचएआर, आईआरडीई, टीबीआरएल आदि प्रतिष्ठानों के वरिष्ठ निदेशकगण उपस्थित थे।