”विज्ञान संवाहको, लेखकों और पत्रकारों का सशक्तिकरण” – चार दिवसीय कार्यशाला संपन्न

समुचित वैज्ञानिक सोच से मिलेगी उत्कर्ष की राह-डा.चिन्मय पण्डया

हरिद्वार, 31 अगस्त।
देव संस्कृति विश्वविधालय के प्रति कुलपति डा. चिन्मय पण्डया ने कहा कि मनुष्य की सर्वांगीण उन्नति के लिए शिक्षा के दो पहलु ज्ञान और विज्ञान का समनिवत आधार अनिवार्य है। तकनीकी विकास के दौर में जितना अर्जित किया है, उससे अधिक खोने का दुष्परिणाम समाज और राष्ट्र ने भोगा है। समुचित वैज्ञानिक सोच से ही उत्कर्ष की राह मिलेगी।
डा. पण्डया देसंविवि में शुक्रवार को लोकहित फाउंडेशन और राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौधोगिकी संचार परिषद (आरवीपीएसपी) डीएसटी, भारत सरकार नर्इ दिल्ली की ओर से आयोजित चार दिवसीय कार्यशाला में बोल रहे थे। ”विज्ञान संवाहको, लेखकों और पत्रकारों के सशकितकरण विषय पर हुर्इ कार्यशाला में मुख्य अतिथि डा. पण्डया ने कहा कि समय की मांग है कि वैज्ञानिक सोच और विज्ञान पत्रकारिता को राष्ट्र विकास का सूचकांक बनाया जाए। इसकी शुरूआत हम दैनिक जीवन से ही करें। ऐसी कार्यशाला राज्य के दूर-दराज के क्षेत्रों तक प्रसारित हों, तभी यह आम जन की सोच में परिवर्तन लाने में सफल होगा।
आरवीपीएसपी, डीएसटी नर्इ दिल्ली के निदेशक डा.मनोज कुमार पटैरिया ने कहा कि कार्यशाला का उददेश्य तभी पूरा होगा, जब आम आदमी तक विज्ञान एवं प्रौधोगिकी से जुड़ी जानकारियां पहुंचें। विज्ञान संवाहक और पत्रकार आमजन में विज्ञान के प्रति व्यापक जानकारी व जिज्ञासा पैदा करेंगे। इससे वे बाजार की सिथति से प्रभावित न होकर स्वयं निर्णय लेने में सक्षम हो सकेंगे। उनमें जागरूकता बढ़ेगी और वे विकासीय मुददों पर प्रगतिशील सोच रख सकेंगे।
लोकहित फाउंडेशन की अध्यक्षा श्रीमति बिथि चंद्रमोहन ने कहा कि ऐसी प्रशिक्षण कार्यशालाएं राज्य के विकास में बाधा बनने वाली समस्याओं को दूर करने में सहायक होंगी। उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में आरवीपीएसपी की गतिविधियों की सराहना की। श्रीमति चंद्रमोहन ने देसंविवि के कुलपिता पं.श्रीराम शर्मा आचार्य के वैज्ञानिक अध्यात्मवाद की सोच को प्रासंगिक बताया।
कार्यशाला में नकरौंदा गांव निवासी किसान दीपक उपाध्याय को लोकहित कृषक सम्मान 2012 से सम्मानित किया गया। इस मौके पर देसंविवि के रजिस्ट्रार संदीप कुमार ने कहा कि यह विश्वविधालय अदभूत प्रयोगशाला है। इसमें कार्यशाला के प्रतिभागी अपनी ज्ञान संपदा का विनियोग कर उसके सतपरिणामों से लाभानिवत हों। कृषकों का सम्मान करना एक बेहतर समाज की ओर बढ़ते कदमों की आहट है। इससे पूर्व कार्यशाला की शुरूआत दीप प्रज्ज्वलन से हुर्इ। अतिथियों को स्मृति चिन्ह दिए गए। कार्यशाला में राज्य भर से आए करीब 50 प्रतिभागी प्रशिक्षण ले रहे हैं।