वेस्ट का बेस्ट उपयोग, कागज उद्योग

दुनियाभर में पिछले 40 वर्षों में कागज की खपत 400 फीसदी बढ़ी है, इस दौरान काटे गए पेड़ों का 35 प्रतिशत हिस्सा इतना कागज बनाने में लग गया। कागज के बढ़ती मांग को पूरा करने का एक मात्र विकल्प पुराने रद्दी कागज का उपयोग करना है। बेरोजगारी के इस दौर में रोजगार के अवसर अनायास ही लोगों का ध्यान खींच लेते हैैं। और यदि उस रोजगार में स्वावलंबन जुड़ा हो तो सोने पे सुहागा। कुछ ऐसा ही प्रयोग कर रहा है देवसंस्कृति विवि का हस्त निर्मित कागज उघोग। क्योंकि आज दुनिया में बढ़ते कागज की खपत का कोई विकल्प नहीं रह गया। और रद्दी कागज का ढेर दिन-प्रति-दिन बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में कागज निर्माण के लिए ढेरों पेड़-पौधे काटे जा रहे है और पुराने कागज का कोई उपयोग भी नहीं हो पाता।

पर्यावरण के प्रति अपनी निष्ठा व जिम्मेदारी का वहन करते हुए देव संस्कृति विश्वविद्यालय में कागज की बढ़ती मांग व पुराने रद्दी कागज का उपयोग के लिए हस्त निर्मित कागज उद्योग की स्थापना की गई है। घरेलु तथा कारखानों में से निकला जैविक कचरा इन कारखानों के लिए कच्चा पदार्थ का काम करती है।

साधारण खर्च से शु़रू होने वाला यह उद्योग आमदनी का स्रोत ही नहीं नये रोजगार भी उत्पन्न कर रहा है। विश्वविद्यालय के अन्य स्वावलंबन केन्द्र जिसमें गौ उत्पाद, खादी उद्योग, फूड प्रोसेसिंग आदि शामिल है उसमेें  हस्त निर्मित कागज उत्पादन केन्द्र भी अपना विशेष महत्व रखता है। इस केंन्द्र में लोगों को धरेलु कचरे की मदद से कागज तैयार करना सिखाया जाता है। प्रशिक्षण देने की तर्ज पर चल रहा यह केन्द्र रोजाना 33/26 इंच की 500 शीटें तैयार करता हैै। इससे लोगों को रोजगार व काम सीखने का मौका दोनों मिल रहा है।

समय समय पर लोगों को इस कारखाने का सेटअप लगाने और कागज के निर्माण की विधि सिखलाई जाती है। इस विधि में एक बार कच्चा पदार्थ यानी कि जैविक कचरा इकठा हो जाने के बाद उसे कुल पँाच प्रोसेसिंग स्टेज से गुजारा जाता है। पहला सेग्रीमेंटिग विधि में कचरे से प्लास्टिक शीशा आदि पदार्थो को हटाया जाता है। फिर चौपर विधि से कचरे को छोटे छोटे टुकडों में इक_ा किया जाता है। डाइजेस्टर में कचरे को गलाया जाता है। फिर बिटर चरण में अलग अनुपात में पदार्थों को मिलाया जाता है।

पल्पर चरण, कचरे के कागज के शीट में तब्दील होने के पहले का प्रोसेसिंग है। इसमें कागज कि लुगदी तैयार की जाती है। इसके अलावा अन्य प्रेासेसिंग जैसे ब्लिचिंग कलरिंग आदि से कागज में रंग डाला जाता है। तब जाकर कहीं कागज तैयार होता है। यहां कागज की विभिन्न सामग्री, जैसे कागज की फाइलें, विभिन्न डिजाइन के चार्ट पेपर, थैले, लिफाफा आदि तैयार किए जा रहे हैं।