शिक्षा, संस्कृति और स्नेह संवेदना लेकर लौटा इटली का दल

शिक्षा, संस्कृति और स्नेह संवेदना लेकर लौटा इटली का दल
स्नेह संवेदना का अटूट भण्डार है शांतिकुंज: पिटी फेवियो
हरिद्वार १२ फरवरी। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय, शांतिकुंज सिर्फ विश्वविद्यालय भर नहीं, बल्कि स्नेह-संवेदना और करुणा का अटूट भण्डार है। यहाँ शिक्षा के साथ संस्कृति और संस्कारों से व्यक्तियों को पिरोया जाता है। यह कहना है इटली के पीटी फैवियो का। वे कहते हैं- मैं भारत और उत्तराखण्ड में पहली बार आया, किन्तु मैंने भारत के लिए जो कुछ सुना था, उसका सही स्वरूप यहीं आकर देखने को मिला। शांतिकुंज की भूमि पर सच में अध्यात्म का जीवन्त स्वरूप विद्यमान है। सेन्ट्रो स्टडी भक्ति वेदान्ता इटली से आये यह दल ने देसंविवि में रहकर नौ दिन तक योग, आयुर्वेद और ट्रेडिशनल इण्डियन साइन्स पर अभ्यास किया। एकादमी ऑफ ट्रेडिशनल इण्डियन साइन्स, पिसा के प्रो० अदरना बोनी और मैक्रो फिटी के अनुसार यहाँ पर रहकर हमने भारतीय वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति के बारे में काफी कुछ जाना। ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान के वैज्ञानिक अध्यात्मवाद के सिद्धान्तों को जानकर भारतीय ऋषियों के विचारों से अवगत हुए। यहाँ का यज्ञोपैथी अपने आपमें अनूठा और कारगर विधा है। आने वाले दिनों में यज्ञोपैथी चिकित्सा क्षेत्र में अनिवार्य वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति के रूप में प्रयोग होगी, ऐसा विश्वास है।
यज्ञोपैथी के साथ पंचकर्म, प्रज्ञायोग, नादयोग, प्राण चिकित्सा आदि अनेक वैकल्पिक चिकित्सा पाकर इटली ग्रूप प्रभावित हुआ। आज के तनाव और भागमभाग भरी जिन्दगी में भी सुख और शांतिमय जीवन कैसे जिया जा सकता है, योग से मानसिक शांति कैसे प्राप्त की जा सकती है, ऐसी अनेक विधियाँ इन नौ दिनों में इटली दल ने प्राप्त की। दल के प्रत्येक सदस्य का मानना था कि वे निश्चय ही बार बार भारत आयेंगे।
नव दिवसीय प्रशिक्षण पाकर लौट रहे इटली दल की विदाई बेला संवेदना से ओतप्रोत थी। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने दल के प्रत्येक सदस्य को प्रमाण पत्र देते हुए कहा कि यह उनका अपना घर है। आप कभी भी आकर यहाँ आध्यात्मिक एवं शैक्षणिक मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।