स्वावलंबन के द्वार खोलता ग्राम प्रबंधन विभाग

देसंविवि, हरिद्वार : स्वावलंबी युवा एवं सम्पन्न राष्ट्र के सिद्धांत को आधार बनाकर ग्राम प्रबन्धन विभाग लोगों को स्वालंबन की राह चला रहा है। देश भर में इसके जरिए ४५ रचनात्मक केेन्द्रों का संचालन किया जा रहा है। जहां साबुन बनाने से लेकर मधुमक्खी पालन व सूत कताई काम का प्रशिक्षण देकर लोगों को कुशल कारीगर बनाया जाता है। ग्राम प्रबंधन विभागाध्यक्ष का कहना है कि विभाग का मुख्य काम ग्राम विकास व्यवस्था तैयार करना और  क्षेत्रिय व संगठनात्मक ढ़ांचा तैयार करना है। स्वावलंबन के पाठ्यक्रम को भी इसी बात को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है कि लघु उद्यमों की बारीकियों को सीख अपना कार्य शुरू कर सकें।

उन्होंने बताया कि संगठनात्मक ढ़ांचेे के अंतर्गत विभिन्न राज्यों में ४५ रचनात्मक केन्द्र स्थापित किए गए हैं। लोगों को प्रशिक्षण देने के लिए  उन्हीं के गांव में ५ से ६ दिन की ट्रेनिंग भी दी जाती है। इसके अलावा देश भर में ८० गौशाला का संचालन भी ग्राम प्रबंधन विभाग द्वारा किया जा रहा है, जिनमें गौ उत्पाद बनाए जाते हैं, साथ ही लोगों को इन उत्पादों के बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। इस विभाग के द्वारा कई कोर्स चलाए जाते हैं, जिसमें एक माह, डेढ़ माह, छह माह व एक वर्ष के कोर्स शामिल हैं। इसके अंतर्गत विभिन्न घरेलू व व्यवसायिक उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। जैम, कैंडी, मुरब्बा, च्यवनप्राश, अचार, साबुन, डिटर्जेंट, धूपबत्ती, अगरबत्ती, मोमबत्ती, कागज, ग्रीटिंग कार्ड, फाइल कागज, बेकरी उत्पादों में  रस्क, बिस्किट, केक, पेस्ट्री आदि बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। मधुमक्खी पालन, गौ उत्पाद जैसे अर्क, हरड़ चूर्ण, गौमूत्र आसव, कामधेनु नारी संजीवनी आदि बनाना सिखाया जाता है। भविष्य में ग्रामीण फूड प्रोससिंग के तहत बड़ी, पापड़, मूँगफली, सत्तू का उत्पादन शामिल है। पत्ता आधारित उत्पाद में पत्तल, दोना एवं प्लेट बनाने का  प्रशिक्षण दिया जाएगा।

स्वावलंबन से ायम ी मिसाल

ग्राम प्रबंधन विभाग में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके राजस्थान जिला झालावाड़ के गांव कांदल खेड़ी के रहने वाले सज्जन सिंह बताते हैं कि उन्होंने यहीं से गौ उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया था। आज वह हरड़ चूर्ण, बुकनू चूर्ण, गौ अर्क बनाने का काम अपने गांव में कर रहे हैं। बताते हैं कि उन्होंने अपने उत्पाद को मार्केट में बेचने के लिए एक खास नाम देने के साथ पैकेजिंग पर विशेष ध्यान दिया। उत्पाद की खासियत व नाम को लोगों के बीच प्रचारित करने के लिए आस-पास के शहरों व कस्बों में प्रचार भी करवाया। उन्होंने अपने उत्पाद को लोगों को आसानी से उपलब्ध कराने के लिए किराना व मेडीकल स्टोरों पर रखवाया। वह अपने लघु उद्यम द्वारा पांच लोगों को रोजगार देने के साथ ५०-60 हजार मासिक आसानी से कमा लेते हैं।