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25वाँ ज्ञान दीक्षा समारोह में अध्यात्म क्षेत्र के तीन पुरोधाओं का मिलन | DSVV
5th Convocation Ceremony to be held on 8th of April, 2017    Academic Calendar: Regular Odd Semester 2016

25वाँ ज्ञान दीक्षा समारोह में अध्यात्म क्षेत्र के तीन पुरोधाओं का मिलन

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हरिद्वार 13 जुलाई।

एक मंच पर संन्यासी, समाजसेवा व अध्यात्म क्षेत्र के तीन पुरोधाओं के मिलन ने देसंविवि के नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं के साथ उपस्थित लोगों को रोमांचित कर दिया।सभी ने अपने अनुभवों, घटनाओं एवं शोध किये विषयों को तर्क, तथ्य एवं प्रमाण के साथ लोगों से साझा किया, तो यह दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाला था ।

वक्ताओं ने एक तरफ महापुरुषों के वचनों को आत्मसात करनेके बाद उभरे व्यक्तित्व की चर्चा की, तो वहीं प्रेम, प्यार से जंगली हिंसकप्राणियों को मित्रवत् व्यवहार करने वाले दृश्य को चित्रित किया गया। अध्यात्मवेत्ता ने अध्यात्म पथ पर चलकर शिखर तक पहुंचने हेतु सीढ़ी – सीढ़ी प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। यह अवसर था देवसंस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार के 25वाँ ज्ञान दीक्षा समारोह का । समारोह में जम्मू कश्मीर, गुजरात, बिहार, झारखंड, उप्र, मप्र, अण्डमान निकोबार, असम, कर्नाटक, केरल सहित विभिन्न राज्य के तथा जापान व आस्ट्रेलिया के नवप्रवेशी विद्यार्थी सम्मिलित थे । अब तक की यात्रा में इसे महत्त्वपूर्ण ज्ञान दीक्षा समारोह बताते हुए देसंविवि के कुलाधिपति डॉ प्रणव पण्ड्या ने कहा कि सार्थक विद्या से महामानव तैयार होंगे,महामानवों से ही भारत विश्व भर में चमकेगा। उन्होंने कहा कि विवि में गीता व ध्यान की कक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ विद्या से स्नान कराया जाता है। स्वामी शांत आत्मानंद जी को आशान्वित करते हुए कुलाधिपति ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के कार्यों को पूरा करने के लिए हमारे विद्यार्थी हर संभव मदद करेंगे। साथ ही आदिवासी क्षेत्र में डॉ आमटे द्वारा निर्मित हो रहे अस्पताल सहयोग करने की बात कही। मुख्य अतिथि रामकृष्ण मिशन दिल्ली के अध्यक्ष स्वामी शांत आत्मानंद ने कहा कि शिक्षा ऐसी हो, जो अपने अंदर की पूर्णता को प्राप्त करा सके। त्याग और सेवा का अनोखा उदाहरण प्रस्तुत कर देव संस्कृति विश्वविद्यालयऐसे ही विद्यार्थियों को गढ़ने में निरन्तर लगा हुआ है। स्वामी विवेकानंद जीके सपनों को पूरा करने का स्तुत्य प्रयास में लगा देव संस्कृति विश्वविद्यालय का यह सराहनीय कदम है । बीहड़ जंगलों में आदिवासियों के विकास कार्य में जुटे डॉ आमटे ने कहा कि दुनिया के चकाचैंध से दूर जंगलों में रहकर आदिवासियों की सेवा करने से आत्मिक संतुष्टि मिलती है । कुलपति श्री शरद पारधी ने कहा कि समझदारी, ईमानदारी, जिम्मेदारी व बहादुरी जैसी विभूति को आत्मसात करने से ही आशातीत सफलता मिलती है। प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या ने मार्मिक शब्दों में एक तरफविद्यार्थियों को अपनापन का अहसास कराया, तो वहीं अनुशासित जीवन जीने की सलाह दी। कार्यक्रम के समापन पर कुलसचिव संदीप कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इससे पूर्व कुलाधिपति डॉ प्रणव पण्ड्या ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों एवंआचार्यों को मिलकर शिक्षण कार्य एवं व्यक्तित्व विकास के साथ आगे बढ़ने का दीक्षा संकल्प दिलाया। इस दौरान शोध पर आधारित एक पुस्तिका का विमोचन अतिथियों ने किया। श्री सूरज प्रसाद शुक्ल ने ज्ञान दीक्षा का वैदिक कर्मकाण्डसम्पन्न कराया तो वहीं गोपाल कृष्ण शर्मा एवं अंकुर मेहता ने मंच संचालन किया। इस अवसर पर मैगसेसे पुरस्कार प्राप्त डॉ मंदाकिनी, शांति निकेतन के पूर्व कुलपति डॉ दिलीप सिन्हा सहित शांतिकुंज, देसंविवि परिवार, ब्रह्मवर्चसशोध संस्थान के वैज्ञानिक भी उपस्थित थे।

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