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ज्ञानदीक्षा समारोह के साथ नये सत्र की शुरूआत | DSVV
5th Convocation Ceremony to be held on 8th of April, 2017    Academic Calendar: Regular Odd Semester 2016

ज्ञानदीक्षा समारोह के साथ नये सत्र की शुरूआत

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10 जनवरी को ज्ञानदीक्षा समारोह के साथ देव संस्कृति विश्वविद्यालय का नया सत्र प्रारम्भ हुआ। 26 वें ज्ञानदीक्षा समारोह मृत्युजंय सभागार में सम्पन्न हुआ। इसमें सर्टिफिकेट कोर्स के नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं के साथ पूर्व से पढ़ते आ रहे विद्यार्थी एवं शिक्षकगण मौजूद थे। इस अवसर पर मुख्य अतिथि महावीर वर्धमान मुक्त विश्वविद्यालय, कोटा के कुलपति डॉ विनय पाठक ने कहा कि मनुष्य का जीवन फार्मूलों से नहीं, अच्छे अनुभवों के साथ चलता है।  ज्ञानदीक्षा समारोह के अध्यक्षता करते हुए देसंविवि के कुलाधिपति डॉ प्रणव पण्ड्या ने कहा कि समस्त समस्याओं की जड़ अज्ञानता है। इसी को दूर करने के उद्देश्य से हमारे ऋषियों-महापुरुषों ने देवालय, आरण्यक, तीर्थ, गुरुकुल व आश्रम जैसे संस्थानों की स्थापना व उनका संचालन किया करते थे, जिसके माध्यम से वहाँ आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को जीवन जीने की कला से दीक्षित व शिक्षित किया जाता था। आज उन्हीं परंपराओं का निर्वहन  देवसंस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देसंविवि का मुख्य उद्देश्य ज्ञान की खेती करना है।
इससे पूर्व कुलपति श्री शरद पारधी ने कहा कि विद्यार्थी जीवन मनुष्य जीवन का स्वर्णिम काल होता है। इसी आयु में विद्यार्थी अपने भविष्य व व्यक्तित्व को गढ़ते हैं। प्रति कुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि युवाओं में सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ-साथ विद्या भी आवश्यक है ,देवसंस्कृति विवि के पाठ्यक्रमों के माध्यम से विद्याथियों को इसी ढाँचे में ढाला जाता है। कुलसचिव संदीप कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया। तो वहीं ज्ञानदीक्षा का वैदिक कर्मकाण्ड सूरज प्रसाद शुक्ल ने संपन्न कराया तथा कुलाधिपति ने दोष रहित विद्याध्ययन के सूत्रों का संकल्प दिलाया।
इस अवसर पर देवसंस्कृति विवि के अंतर्राष्ट्रीय जर्नल के पाँचवें अंक का विमोचन किया गया। इससे पूर्व मुख्य अतिथि डॉ पाठक को कुलाधिपति डॉ पण्ड्या ने युगसाहित्य एवं स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। इस समारोह में नवागन्तुक विद्यार्थियों के अलावा पत्रकार बन्धु, देसंविवि परिवार, शांतिकुंज कार्यकर्ता एवं अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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