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देसंविवि का 27वाँ ज्ञान दीक्षा महापर्व सम्पन्न

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राष्ट्र धर्म व मानव सेवा सर्वोपरि ः श्री प्रीतम सिंह

ज्ञान दीक्षा ज्ञान क्रांति का महापर्व ः डॉ प्रणव पण्ड्या

नवप्रवेशी विद्यार्थियों में भारत के 21 राज्यों के अलावा 7 देशों के विद्यार्थी शामिल

26 जुलाई।

उत्तराखंड शासन के शहरी विकास एवं पशुपालन मंत्री प्रीतम सिंह पँवार ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में देवसंस्कृति विश्वविद्यालय का होना एक गौरव की बात है। यहाँ जिस तरह राष्ट्र धर्म निभाने, संस्कृति के प्रचार के लिए सेवाभावी युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है, उससे विवि का नहीं, वरन् देश का नाम भी ऊँचा हो रहा है।

श्री पँवार देवसंस्कृति विवि के 27वाँ ज्ञान दीक्षा समारोह के अवसर पर मुख्य अतिथि की आसंदी से बोल रहे थे। इस महापर्व में विवि में संचालित 39 पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्राप्त छात्रछात्राएँ एवं उनके अभिभावक, शांतिकुंजदेवसंस्कृति विवि परिवार, पत्रकार, पुलिस अधिकारी सहित अनेक लोग उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि ज्ञान, प्रेम व सेवा की गंगा बहाने वाले गायत्री परिवार जिस तरह से कार्य कर रहा है, वह एक सराहनीय है।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में देसंविवि के कुलाधिपति डॉ प्रणव पण्ड्या ने कहा कि सद्गुरु की कृपा से ही सच्चा ज्ञान मिलता है। यदि विद्यार्थी अपने शिक्षक में और शिक्षक अपने विद्यार्थी में गुरुशिष्य के पवित्र भाव से आगे बढ़े, तो वह महामानव बनने की दिशा में अग्रसर हो सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे ही पवित्र भाव को लेकर ऋषिसत्ता की परिकल्पना को साकार करने के लिए देसंविवि कटिबद्ध है। डॉ पण्ड्या ने प्राचीनतम से लेकर आधुनिकतम मार्मिक उदाहरणों के साथ युवाओं को जीवन लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए प्रेरणा दी।

कुलाधिपति डॉ पण्ड्या ने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान में प्रवेश प्राप्त विद्यार्थी के लिए प्रथम दिन महत्त्वपूर्ण होता है और जिस तरह देसंविवि में प्रथम दिन को ज्ञान दीक्षा महापर्व के रूप में मनाया जाता है, इससे हर विद्यार्थी के अंदर में एक क्रांति का बीजाकुंर होता है और यही बीज आगे चलकर महामानव, आदर्शवान, चरित्रवान नागरिक के रूप में समाज के सामने आता है। इससे पूर्व कुलपति शरद पारधी ने ज्ञान दीक्षा के पृष्ठभूमि पर विस्तार से जानकारी दी। तो वहीं प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि वर्तमान समय मनुष्य के लिए एक चुनौति के रूप में खड़ा है। इस अवसर पर कुलाधिपति ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को ज्ञान दीक्षा के वैदिक सूत्रों में पिरोया, तो वहीं इसका वैदिक कर्मकाण्ड सूरज प्रसाद शुक्ल ने कराया।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर कुलाधिपति डॉ पण्ड्या ने शहरी विकास मंत्री श्री पंवार को विवि का स्मृति चिह्न व सत्साहित्य भेंटकर सम्मानित किया। तो वहीं कुलाधिपति डॉ पण्ड्या व शहरी विकास मंत्री ने पांच छात्र व पांच छात्राओं को उपवस्त्र व देसंविवि का प्रतीक चिन्ह भेंट किया। इस मौके पर अतिथियों ने देवसंस्कृति इंटरडिसीपिनरी इंटरनेशनल जर्नल– 6 अंक, रेनेसा नामक ईन्यूज लेटर का विमोचन किया। कार्यक्रम का संचालन गोपाल शर्मा ने किया। इस अवसर पर स्वामी शिवानंद, आशीष रावत, कुलसचिव संदीप कुमार, विभागाध्यक्ष, विवि परिवार, पुलिस अधिकारी, पत्रकारगण आदि उपस्थित थे।


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