4 Day WAVES Conference ends

” वैदिक विचार-क्रांति ” के अनवरत प्रवाह में बना विश्व भागीदार

Inaugural Session :

Academic Session :

Cultural Function :

Deep Yagya :

Valedictory Session :

नौ देशों के ३०० प्रतिभागियों ने पेपर्स प्रस्तुत किए

हरिद्वार, १७ मार्च २०१२

खुशी, दिव्यता और मानवता की राह हमारे अंदर है । चेतना के अंतरतम् में दिव्य प्रकाश विद्यमान है, जो भौतिक और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है । हम सबके लक्ष्य एक हैं । वेद और विचार-क्रांति के माध्यम से इसकी प्राप्ति अवश्यम्भावी है । यही राह अखिल विश्व गायत्री परिवार के संस्थापक एवं इस युग के ऋषि, द्रष्टा, वेदमूर्ति, तपोनिष्ठ, पं० श्रीराम शर्मा आचार्य ने दिखाई । यह विचार देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने देव संस्कृति विवविद्यालय में ” वेद और विचार-क्रांति ” विषय पर आयोजित चार दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के समापन समारोह में व्यक्त किए ।

देव संस्कृति विश्वविद्यालय, वेव्स इंटरनेशनल और वेव्स इंडिया की ओर से आयोजित समारोह की अध्यक्षता करते हुए उपकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम नए रिश्तों की शुरूआत के साथ उसकी खुशबू को पूरे विश्व में फैलाने में अहम भूमिका निभाते हैं । वैदिक संदेश को प्रसारित करने का यह महत्वपूर्ण माध्यम है । वेव्स इंटरनेशनल यूएसए के प्रो०बलराम सिंह ने समापन समारोह को आशीर्वाद समारोह करने की सलाह दी और कहा कि यह अनवरत चलने वाला प्रवाह है । ऐसे आयोजन से पूर्व और पश्चिम की संस्कृति का मिलन होता है, जिससे उपजी नई सोच विश्व को नई दिशा देती है । शंकराचार्य विश्वविद्यालय, केरला के प्रो.पी.सी मुरलीमाधवन ने देव संस्कृति विश्वविद्यालय में मिले दिव्य अनुभवों को व्यापकता प्रदान करने पर जोर दिया । उन्होंने कहा कि वैदिक विचार आज भी प्रासंगिक हैं ।

देव संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो०सुखदेव शर्मा ने कहा कि वेद विश्व की धरोहर है । इस पर सबका समान रूप से अधिकार है । वेदों का प्रेरक संदेश पूरा विश्व ग्रहण करे । इसी उद्देश्य से यह कार्यक्रम सम्पन्न हुआ । वैदिक ज्ञान मंथन के प्रवाह को निरंतरता प्रदान करना इस आयोजन की एक अहम उपलब्धि रही । यह यात्रा अनेकता में एकता का संदेश लेकर चलती रहे, तभी ऐसे कॉन्फ्रेन्स की सार्थकता सिद्ध हो पाएगी । उत्तराखण्ड संस्कृत एकेडमी के वाइस प्रेसीडेंट प्रो०महावीर अग्रवाल ने वेद रूपी सागर के १४ रत्नों को जीवन में धारण करने की प्रेरणा दी । उन्होंने कहा कि वेदों के प्रति अगाध निष्ठा, माता-पिता, गुरु, जन्मभूमि का सम्मान, यज्ञीय-जीवन, सदाचार, मित्रदृष्टि जैसे रत्नों को पहन अपने व्यक्तित्व को आलोकित करें और दूसरों को भी प्रकाशित करें । देव संस्कृति विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार संदीप कुमार ने वेदों से आत्मोन्नति की शिक्षा आत्मसात करने की प्रेरणा दी ।

वेव्स इंटरनेशनल के संस्थापक अध्यक्ष प्रो०भूदेव शर्मा ने लेख प्रतियोगिताओं को पुरस्कृत किया| उमेश कुमार ने चार दिवसीय कॉन्फ्रेन्स की रिपोर्ट पेश की । इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ । देव संस्कृति विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने वैदिक संदेश से ओत-प्रोत प्रज्ञा-गीत की प्रस्तुति दी । अंत में वेव्स इंडिया की महासचिव डॉ०शशि तिवारी ने आभार जताया । भारत सहित नौ देशों से आए प्रतिभागियों ने शुक्रवार की शाम महाकाल-मंदिर में दीपयज्ञ में भागीदारी निभाई और यज्ञीय-जीवन का मर्म समझा ।

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