Internship
देव संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा अपने स्थापना वर्ष-2002 से ही इण्टर्नशिप कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया था । प्रथम बैच की इण्टर्नशिप टोलियाँ जुलाई, 2003 में विश्वविद्यालय से निकली थीं । लक्ष्य था- विश्वविद्यालय से निकले स्नातक यहाँ प्राप्त शिक्षण व ज्ञान को अभिव्यक्ति दे सकें, उसे व्यावहारिक कौशल में बदल सकें । उद्देश्य यह भी था कि हमारे छात्र-छात्राएँ अपनी युवावस्था में ही समाज के ऋण से उऋण होने का अभ्यास डालें और जिस राष्ट्र-समाज ने उनकी शिक्षा-दीक्षा में प्रत्यक्ष-परोक्ष, ज्ञात-अज्ञात सहायता की है, उस समाज की यत्किंचित् सेवा करके कृतज्ञता ज्ञापित करें । साथ ही समाज के दुःख दर्द की अनुभूति कर उसका यथासम्भव निवारण कर सकें ।
सितम्बर-2010 तक इण्टर्नशिप के 15 चरण सम्पन्न हो चुके हैं, जिनमें 2,824 छात्र-छात्राएँ भाग ले चुके हैं । 771 विद्यार्थी टोलियों द्वारा 14,500 से अधिक 5-5 दिनों के योग शिविर तथा 35,000 से अधिक अन्य विविध छोटे-बड़े कार्यक्रम देश के 25 राज्यों के भाहरी व ग्रामीण अंचलों में सम्पन्न कराए जा चुके हैं । ये सेवा कार्य करके विद्यार्थी प्रचुर आत्मविश्वास के धनी बनते है
1प्रतिवर्ष लगभग 500 सुशिक्षित युवाओं का 90 दिन का समयदान मातृसंस्था को मिलता है ।
1युवा विद्यार्थी नई पीढ़ी के बीच स्कूलों में जाकर कार्यक्रम अधिक देते हैं । फलतः अनुमानतः 48.00 लाख उन किशारों/युवाओं तक जिनने देव संस्कृति विश्वविद्यालय-युग निर्माण मिशन के बारे में पहले ज्यादा नहीं सुना था, तक युग सन्देश अब तक विश्वविद्यालय के इस प्रसार अभियान के माध्यम से पहुँचा है । अच्छी अनुभूति यह हुई है कि ‘भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा’ में भाग ले चुके वहाँ के स्थानीय विद्यार्थी देसंविवि के इन सीनियर विद्यार्थियों को सुनकर प्रसन्न भी हुए और प्रेरित भी । संवैधानिक शिक्षा संस्थान होने के कारण प्रचुर युवा शक्ति देसंविवि में स्वतः आ रही है ।
