Youth Conventions

बड़े परिवर्तनों के लिए युवा मन जरुरी – डाँ पण्ड्या
देसंविवि में युवा प्रतिनिधियों की राष्ट्रीय कार्यशाला
जन्म शताब्दी समारोह २०११-२०१२ की तैयारियाँ शुरु

देव संस्कृति विश्वविद्यालय, २५ अप्रैल। वर्तमान समय बड़े परिवर्तन का है। इन दिनों वैश्विक स्तर पर अनेक परिवर्तन के लिए, क्रान्ति के लिए युवा तन का ही नहीं युवा मन का भी होना जरुरी है। जो तन से थक जाए और मन से हार जाए वह बुढ़ा है। अन्दर से जीवट वाले ही युवा होते हैं। युवा ही वर्तमान है। क्रान्तियाँ सदैव वर्तमान से-युवाओं से ही सम्भव हुई हैं और सम्भव होगीं। ५४ करोड़ युवाओं के देश से सम्पूर्ण विश्व को बड़ी आशाएँ हैं।
यह उदगार आज देव संस्कृति विश्वविद्यालय के श्रीराम भवन सभागार में शान्तिकुञ्ज के गायत्री परिवार युथ ग्रुप द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के समापन सत्र में संस्थापक डाँ प्रणव पण्डया ने व्यक्त किये। यह कार्यशाला २०११-२०१२ में आचार्य श्रीराम शर्मा के जन्म शताब्दी समारोहों की पूर्व जानकारी देने एवं तैयारी शुरु करने हेतु देश के प्रमुख युवाओं के साथ आयोजित की गयी है। डाँ. पण्डया ने गायत्री परिवार-शांतिकुंज के स़ंस्थापक युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के युवा मन की विशेषताओं के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि शांतिकुंज को आध्यात्मिक विभूतियों की साधना स्थली और एक पावर हाउस के रुप में विकसित किया गया है। परिवर्तन सदैव तपस्वी स्तर की प्रतिभाएँ करती हैं, आचार्यश्री ने शांतिकुंज की स्थापना ऐसी प्रतिभाओं के सृजन के लिए ही की, जिसकी सभी मर्यादाओं को अक्षुण्ण बनाए रखने का प्रयास गायत्री परिवार द्वारा किया गया है।