MOU for the spread of Education with Dongguk University, Korea

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हरिद्वार ९ अगस्त।
देवसंस्कृति विवि शांतिकुंज एवं डोंग्गुक विवि, सियोल कोरिया के बीच एमओयू (मेमोरेण्डम ऑफ अंडरस्टैण्डिंग) पर हस्ताक्षर हुए। देवसंस्कृति विवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या एवं डोंग्गुक विवि के प्रमुख डॉ. चोंगसिक किम ने समझौता पर हस्ताक्षर किये। इसके तहत दोनों संस्थान मिलकर धर्म और अध्यात्म विषय पर कार्य करेंगे। वहीं युवावर्ग को उनके स्वस्थ आध्यात्मिक लक्ष्यों तक पहुंचाने में सहयोग करेंगे। दोनों संस्थान अपने-अपने विद्यार्थियों को सेमीनार व विभिन्न शोधों के माध्यम से परस्पर विकास के अवसर प्रदान करेंगे।
डॉ. चिन्मय पण्ड्या के अनुसार इस समझौते से देवसंस्कृति विवि के संरक्षक संस्थापक पं. श्रीराम शर्मा जी के विचारों को भौतिकवादी मानसिकता को बदलने के लिए पूर्वी देशों में पहुँचाने में सहायता मिलेगी। डॉ. पण्ड्या ने कहा कि भारत के ऋषि-मनीषियों ने दुनिया के कोने-कोने में देवसंस्कृति के बीज बोये और इस संस्कृति को सारे विश्व में फैलाया। शांतिकुंज एवं देवसंस्कृति विवि उस पावन परंपरा को पुनर्जीवित करने के लिए सतत प्रयत्नशील रहा है। वहीं डॉ. किम ने युगऋषि द्वारा रचित साहित्य को कोरियन भाषा में अनुवादित करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि प्रथम चरण में युवा एवं नारी जागरण विषय पर लिखे साहित्य को अनुवादित किया जायेगा। दल के सदस्य समयदान व अंशदान पर चलाये जा रहे देसंविवि की व्यवस्था एवं विद्यार्थियों के अनुशासन को देखकर आश्चर्य चकित थे। दल ने  कुलपति डॉ. सुखदेव शर्मा एवं कुलसचिव संदीप कुमार से भेंट कर विचार-विमर्श किया।
इससे पूर्व देवसंस्कृति विश्वविद्यालय व शांतिकुंज के दो दिवसीय प्रवास पर कोरिया से आये १८ सदस्यीय दल में प्रोफेसर, आर्टिस्ट, कवि, डायरेक्टर सहित विभिन्न विधाओं के विशेषज्ञ शामिल हैं। दल ने शुक्रवार को संस्था प्रमुख शैल दीदी से भेंटकर शांतिकुंज द्वारा संचालित विभिन्न रचनात्मक कार्यों को समझा। इस अवसर पर शैल दीदी ने विश्व में शांति और सद्भाव के विकास के लिए परस्पर मिलकर कार्य करने की आवश्यकता बतायी। संस्था प्रमुख ने अतिथियों को सपरिवार आने का निमंत्रण दिया, जिसे सभी ने स्वीकारते हुए पुन: आने का आश्वासन दिया।
दल को शांतिकुंज एवं देवसंस्कृति विवि का भ्रमण गोपाल शर्मा व सुदर्शन कुमार ने कराया। उन्होंने शांतिकुंज स्थित ध्यान कक्ष में ध्यान साधना की। ध्यान कक्ष-देवात्मा हिमालय में बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री आदि तीर्थों के दर्शन कर आनंदित हुए। दल में ८ महिला व १० पुरुष सदस्य शामिल थे।

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